आंवले का अचार

आंवले का अचार 


आवला, आप सभी जानते ही है की आवला सेहत के लिए कितना अच्छा होता है  शरीर को बहुत फायदा करता है   आंवले में विटामिन `सी ` प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जो की आँखो के लिए बहुत अच्छा होता है 

सामग्री

आंवले 500 ग्राम
सौंफ 1,1/2 चम्मच
मेथी 1 चम्मच
कलोंजी 1 चम्मच
राई 1 चम्मच
जीरा 1 चम्मच
हींग 2 चुटकी
लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच
नमक 2 बड़े चम्मच
हल्दी पाउडर 1 चम्मच
तेल 2 बड़े चम्मच

बनाने की विधि


हींग को छोड़कर बाकी सारे मसाले भून लें और ठंडा करके पीस ले आवला धोकर उबाल लें ,फिर बड़ी थाली में निकालकर दो -ढाई घंटे धूप में सूखा लें अब एक पैन में 2 बड़े चम्मच तेल गर्म करे इसमें पहले हींग डालें इसमें  भुने हुए मसाले और हींग डालें फिर नमक मिर्च और हल्दी मिलाएं अब इस मिश्रण को धीमी आंच पर 5 -6 मिनट पकाकर ठंडा करके साफ शीशे में डालें इसे आप दो महीने तक रख सकती है यह आपके ब्लड प्रेशर को ठीक रखता है और हदय रोगी के लिए भी कम तेल वाला यह अचार उपयुक्त है /




वनीला ( Vanilla ) .....केसर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे कीमती मसाला

वनीला ( Vanilla )
 पूरी दुनिया में जितनी भी आइस्क्रीम बनती है, उसमें से 40% 'वनीला' फ्लेवर की होती हैं। सिर्फ आइस्क्रीम ही नहीं बल्कि केक, कोल्ड ड्रिंक, परफ्यूम और दूसरे ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी इसका काफी यूज होता है। वनीला की कई देशों में काफी डिमांड है। पिछले कुछ सालों में वनीला की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 2015 में वनीला बीन्स 11500 रु प्रति किलो थी, जो 2016 में बढ़कर 14500 रु और 2017 में 24 हजार रु तक पहुंच गई। पिछले दिनों मैडागास्कर में आए चक्रवातीय तूफान के चलते इस साल वनीला की कीमतें 40 हजार रु प्रति किलो तक आ गई हैं। दुनिया का 75% वनीला 'मैडागास्कर' में ही पैदा होता है। इंडिया में इसकी कीमत ऊपर-नीचे होती रहती है।भारत में 1 किलो वनीला खरीदने पर आपको 40 हजार रुपए तक देना पड़ सकते हैं। ब्रिटेन बाजार में 600 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गया है। भारत में इस समय चांदी 43,200 रुपए प्रति किलो की रेट से बिक रहा है तो ब्रिटेन के मार्केट में चांदी 530 डॉलर (35,500 रुपए) प्रति किलो के भाव से बिक रहा है।

नीला आर्किड परिवार का मेम्बर है। यह एक बेल पौधा है, जिसका तना लंबा और बेलनकार होता है। इसके सुगंधित और कैप्सूल के जैसे होते हैं। फूल सुखाने पर खुशबूदार हो जाते हैं और एक फल से कई सारे बीज मिलते हैं।


 खेती के लिए क्या हैं जरूरी बातें
  
वनीला की बेल लगाने के लिए कटिंग या बीज दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है हालांकि बीज का इस्तेमाल ज्यादा नहीं किया जाता क्योंकि इसके दाने छोटे होते हैं और उगने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
बेल लगाने के लिए मजबूत और स्वस्थ कटिंग को चुना जाता है।

जब वातावरण में नमी हो तब आप इसकी कटिंग को लगा सकते हैं। लगाने से पहले गड्ढे बनाकर उनमें पूरी तरह से गली सड़ी खाद डाली जाती है। कटिंग को मिट्टी में दबाने की जरूरत नहीं होती। सतह के ऊपर बस थोड़ी सी खाद और पत्तों से ढक दिया जाता है, कटिंग की दूरी 8 फिट रखी जाती है।

सहारे के लिए पेड़ या 7 फिट लम्बे लकड़ी या सीमेंट के पिलर लगाए जाते हैं। बेल को फैलने के लिए तार बांधी जाती है। खेत में लगा रहे हैं तो एक एकड़ में 2400 से 2500 बेल होना चाहिए।

वनीला की फसल को ह्यूमिडिटी, छाया और मध्यम तापमान की जरूरत होती है।

आप ऐसा वातावरण बना सकते हैं। शेड हाउस बनाकर फव्वारा विधि से ऐसा किया जा सकता है।

तापमान 25 से 35 C तक होना पैदावार के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

पेड़ों से छनकर जो रोशनी आती है वो वनीला की फसल के लिए ज्यादा अच्छी मानी जाती है।

आपके खेत में बहुत सारे पेड़ या बाग है तो आप इंटरकोर्प की तरह इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं।
वनीला की फसल 3 साल बाद पैदावार देना शुरू करती है

लगाने की क्या है प्रॉसेस...कैसी होना चाहिए मिट्टी

वनीला की खेती के लिए मिट्टी भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर होना चाहिए। आप एक्सपर्ट से जांच करवाकर यह पता कर सकते हैं कि आप जिस क्षेत्र वनीला लगाने जा रहे हैं, वहां की मिट्टी की क्वालिटी कैसी है।

वनीला की खेती में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए।

जमीन की ph 6.5 से 7.5 तक होनी चाहिए। इससे पहले मिट्टी की जांच करवानी चाहिए।

जांच में अगर जैविक पदार्थों की कमी पता चले तो गली सड़ी गोबर की खाद, केंचुए की खाद यहां डाली जा सकती है।
 

फसल लगाने के बाद क्या करें

खेत में गोबर से तैयार खाद, केंचुए की खाद, नीम कके आदि डालते रहना चाहिए।

2 दिन के अंतर से फव्वारा विधि या टपका विधि से पानी देना चाहिए।

 खेत में एफवायएम, गोबर की खाद, केंचुए की खाद आदि डालते रहना चाहिए।

1 किलो एनपीके को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए।
बैल को तारों के ऊपर फैलाया जाता है। इसी ऊंचाई 150 सेमी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

 फूल से लेकर फलियां पकने तक में 9 से 10 माह का समय लग जाता है।

 वनिला को पूरी तरह पकाने के लिए क्युरिंग, स्वेटिंग, ड्राइंग और कंडिशनिंग की प्रॉसेस से निकलना होता है। इसके बाद वनीला तैयार होता है।

भूत जोलोकिया ( Capsicum Chinense Jacquin ) - दुनिया की सबसे तीखी मिर्च

भूत जोलोकिया मिर्च  ( Bhut Jolokia )

खाने की रंगत और तीखापन बिना मिर्च के पूरा हो ही नहीं सकता जब तक सब्जी में मिर्ची वाली लाल रंगत नहीं दिखती तब तक स्वाद फीका रहता है मिर्च से यह लाल रंग और स्वाद का असली जायका आता है क्या आप सबसे तीखी मिर्च का नाम जानते हैं ? लोग अक्सर मानते हैं कि 'कश्मीरी मिर्च' ही सबसे तीखी होती है लेकिन ये गलत है इस मिर्च का यह नाम नागा क्षेत्र की पहाड़ी एव जँगलो मे पाए जाने वाले काल्पनिक भूत के नाम पर रखा गया है इसे भूत मिर्च, यू-मोरोक, लाल नागा, नागा ,भूत जोलोकिया, बिह ज़ोलोकिया ,तेजपुर मिर्च के रूप में भी जाना जाता है इस मिर्च को ' राजा मिर्च ' भी कहते हैं असम के कुछ हिस्सों में, इस मिर्च को नोगा ज़ोलोकिया कहा जाता है जिसका नाम नागालैंड के मैदानों और पहाड़ियों में रहने वाले क्रूर नागा योद्धाओं के नाम पर रखा गया है इस मिर्च का पाउडर इतना तीखा होता है कि चुटकीभर डालने से ही सब्जी एकदम तीखी और चटपटी हो सकती है यह मिर्च साधारण मिर्च की तुलना में 400 गुना ज़्यादा तीखी  है आमतौर पर ये मिर्ची नॉर्थ इंडिया में देखने को नहीं मिलती। ये आपको नॉर्थ ईस्ट में देखने को मिलेगी अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड,असम के पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों में और बंगला देश के कुछ हिस्सों में इस मिर्च की खेती की जाती है 2007 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने यह प्रमाणित किया कि 'भूत जोलोकिया मिर्च 'दुनिया की सबसे तीखी मिर्च मिर्च है लेकिन अमेरिका की 'कैरोलाइना रीपर' ने इसे काफी पीछे छोड़ दिया है और अब गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करा लिया है मिर्च की तीखी ज्वलनशीलता मापने का मानक स्कोविल्ले हीट स्केल है भूत जोलोकिया में 10 लाख एसएचयू से ज्यादा तीखापन है इस मिर्च को पकड़ने से भी हाथ में जलन होने लगती है इसीलिए इसे चिमटे से पकड़ना पड़ता है इस मिर्च के टुकड़े को जीभ पर रखना मतलब पानी पानी करना है कई लोगो ने इसे खाने की चुनौती स्वीकार की लेकिन इसके खाने के बाद उनकी हालत बेहद खराब हो गयी। इसे खाने वाले लोगो ने कहा की 'वो अब मर ही जाएँगे ' इस मिर्ची में पाए जाना वाला 'ओलियोरेसिन' तत्व इसका स्वाद तीखा करता है

भूत जोलोकिया मिर्च के फायदे और नुकसान 

भूत जोलोकिया को भोजन और मसाले के रूप में मुख्यता प्रयोग किया जाता है जंगली हाथियों को घरो और फसलों से दूर रखने के लिए इस मिर्च से बने घरेलू बमो का इस्तेमाल किया जाता है इसकी तीखी गंध से हाथी भाग जाते है 2009 में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ ) के वैज्ञानिकों ने सेना के हथियारों में इस मिर्च का उपयोग करने की घोषणा की आतंकवादियों को गुफाओं से बाहर निकालने और दंगाइयों को नियंत्रित करने के लिए अश्रु गैस की जगह इस भूत जोलोकिया मिर्ची से बने बम्ब ( पावा शेल्स ) और स्प्रे को विकसित करने की योजना बनाई गई ये दुश्मन के शरीर पर बड़े बड़े घाव कर देती है जिससे उसे तेज़ जलन होती है। यह मिर्च इतनी ज़्यादा तीखी है की कोई इसे ज़रा सा भी चख ले तो अजीबो ग़रीब हरकत करने लगता है। ये लाल ,हरे ,पर्पल ,ब्राउन ,सफ़ेद ,पीली ,नारंगी ,और काले रंगो में मुख्यता पाई जाती है

नॉर्थ ईस्ट में इस मिर्ची को एक दवाई के रूप में काम में लिया जाता है। ये पेट दर्द से राहत दिलाने के लिए बहुत अच्छी दवाई साबित होती है। इस मिर्च से बने पाउडर से पेट की कई बीमारियो का इलाज भी करते है वहीं गर्मी को दूर करने में भी ये बहुत फायदेमंद है। इस मिर्ची से मेडिसिनल फायदे भी मिलते है। दरहसल इस मिर्च में मौजूद एक प्रमुख घातक कैप्साइसिन, आपके स्वास्थ्य को कई फायदे देता है। इस मिर्च से सबसे बड़ी आशा यह लगी हुई है की शायद इससे कैंसर का इलाज ढूंढ पाए। कैप्साइसिन के चिकित्सीय शोध से यह बात सामने आई है की यह प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओ और फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओ को मार सकती है साथ ही यह ल्यूकेमिया सेल्स के विकास को भी रोकती है। यहा तक की इसके अलावा कैप्साइसिन गठिया में होने वाले दर्द, रक्तचाप, मांसपेशियों में दर्द और तनाव, मोच लगना, पाचन से संबंधित समस्याए आदि में फायदेमंद है अगर आप अपने जीवन में एक बार इस मिर्च का स्वाद लेना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए आसाम या नॉर्थ ईस्ट के किसी अन्य शहर में जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि ये मिर्च आपको अमेजॉन की साइट पर मिल जाएगी। आप इसे ऑनलाइन ऑर्डर भी कर सकते हैं। दिल्ली में हर साल लगने वाले प्रगति मैदान में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में नागालैंड ,असम के स्टॉल पर यह तीखी मिर्च मिल जाती है जिसे कई लोग सिर्फ शौक से खरीद ले जाते है इसके इस्तेमाल में सावधानी बेहद जरुरी है बच्चो से तो दूर ही रखने में ही भलाई है कुछ नर्सरियों में भूत जोलोकिया मिर्च के पौधे भी आसानी से उपलब्ध हो जाते है असम सरकार ने दुनिया की सबसे तीखी मिर्च भूत जलोकिया उगाने के लिए प्रोत्साहित करने को किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ा दी है।